होली असत्य पर सत्य का प्रतीक है
वर्षों से हम होली का त्यौहार मनाते आ रहे हैं पर क्या हमें पता है की होली क्यों मनाई जाती है और किसके सम्मान में मनाई जाती है?
वर्तमान में लोग एक दूसरे पर रंग लगाते हैं ,और नशा करते हैं, इस तरह से होली के त्यौहार को मनाया जा रहा है।
लेकिन क्या हम हमारे धर्म का विनाश कर रहे हैं तो इसका जवाब यही होगा कि –हां, हम हमारे धर्म का विनाश कर रहे हैं ,क्या किसी ग्रंथ में होली के बारे में लिखा गया है ? क्या होली के अवसर पर नशा करने को बताया गया है?
होली भक्ति का प्रतीक है और भक्ति की जीत का प्रतीक है
क्या है होली का रहस्य
हिरणाकुश नाम का एक राजा हुआ करता था उस राजा के 1 पुत्र था वह पुत्र भक्ति भाव से परिपूर्ण था वह एक स्वच्छ और भक्ति करने वाली आत्मा थी जो संयोगवश हिरणाकुश राजा के घर में पुत्र रूप में जन्म लिया। हिरणाकुश भगवान विष्णु का विरोधी था और वह नहीं चाहता था ,कि कोई मेरे अलावा किसी की पूजा करें। क्योंकि उसने तप करके सिद्धियां प्राप्त कर ली थी ,और उस सिद्धियों में उसे लगता था की अब मेरी कभी मृत्यु नहीं हो सकती, में पूर्ण रुप से हमेशा के लिए अविनाशी हूं इसलिए वह स्वयं को भगवान मान बैठे।
क्या सिद्धियां थी हिरणाकुश में
हिरणाकुश ने तपस्या करके अपनी सिद्धियों में यह सिद्धि प्राप्त की, कि वह "ना तो दिन में मरेगा ,ना वह शाम को मरेगा ,ना किसी अस्त्र से मरेगा, ना किसी शस्त्र से मरेगा ,ना घर में मरेगा ,ना बाहर मरेगा ,ना आकाश में मरेगा ,ना पाताल में मरेगा।
भक्त प्रहलाद की कथा
भक्त प्रल्हाद परमात्मा की बहुत प्यारी आत्मा थी और भक्ति में उसकी बहुत लगन थी जिसके कारण वह छोटी सी उम्र में ही परमात्मा की भक्ति करने लगा और पूर्ण रूप से भगवान विष्णु पर न्योछावर हो गया ,उसकी भक्ति को देखकर भगवान उससे बहुत खुश होते थे परंतु पिता हिरणाकुश के अभिमानी होने से कई बार उसकी भक्ति में बाधा डाली गई ,कभी पिता के द्वारा उसे सांपों के बीच में रखा जाता हैं, ताकि उसकी मृत्यु हो जाए ।
पिता द्वारा उसके ऊपर भक्ति को लेकर बहुत बार विरोध किया गया, लेकिन भक्त प्रहलाद पूर्ण रूप से अपने इष्ट देव पर कुर्बान हो चुका था।
पिता ने सोचा कि जो मेरे दुश्मन की भक्ति करता है वह मेरे घर में कैसे रह सकता है हिरणाकुश की बहन को एक ओढ़नी(जिसे सिर के ऊपर उड़ते हैं) का वरदान था, उसे पहनने ओढ़ने के बाद वह जल नहीं सकती थी तो हिरणाकुश ने सोचा कि भक्त प्रहलाद को जिंदा जला दिया जाए उसने लोगों को इकट्ठा किया और नगरी के बीच में अग्नि जलाई उस अग्नि में अपने पुत्र और बहन को बिठा दिया बहन ने वह ओढ़नी ओढ़ रखी थी और भक्त पहलाद उसकी गोद में था उसने सोचा कि मैं ओढ़नी से बची रहूंगी और प्रहलाद अग्नि में भस्म हो जाएगा ,जैसे ही अग्नि की ज्वाला तेज हुई तो उसी बीच आंधी चली और उस आंधी के अंदर वह ओढ़नी भक्त प्रहलाद के ऊपर आ गई और उसमें हिरणाकुश की बहन जल गई, भक्त प्रहलाद की खरोच भी नहीं हुई , हिरणाकुश की बहन का नाम होलीका था जिसके कारण लोग इसे असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक के रूप में माने जाने लगे ,परंतु वर्तमान में यह बिल्कुल परिवर्तित हो गई ,लोग होली के अवसर पर रंगों के द्वारा एक दूसरे को गंदा करते हैं और अश्लील कपड़ों में नाच गाना करते हैं ,नशा करते हैं जो कि भगवान के विधान के खिलाफ है इससे हमें पूर्ण रूप से हानि होगी और हमारे धर्म को हानि होगी। इसलिए सर्व समाज से निवेदन है कि भक्ति की इस परंपरा को अश्लीलता में ना बदलें इसमें हमें पूर्ण रूप से यह सीख लेनी चाहिए कि हमें हमेशा भगवान को याद करना चाहिए ताकि भक्त प्रहलाद की तरह हमारी भी रक्षा हो और हम भी मोक्ष की प्राप्ति कर सकें।
धन्यवाद
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